Ranjan Ki Vapasi, Chudai Ka Tufaan – Episode 5

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रंजन की वापसी पर मेरी चुदाई तो फिर से शुरू हो गी गयी है, आप इस चुदाई स्टोरी पढ़िए और मजे करिए..

सुहागरात की अगली सुबह मेरी आँख तब खुली जब रंजन मुझ पर चढ़ कर मुझे चोदने में लगा था. मेरी पहली नजर आस पास गयी अशोक को ढँढ़ते हुए, पर वो कही नजर नहीं आया. मैंने अपने हाथों से रंजन को पीठ पर मारते हुए रोकने की कोशिश की.

मैं: “उतर, छोड़ अशोक आ जायेगा.”

रंजन: “अरे घबराओ मत, तुम एक दिन के लिए मेरी बीवी हो. मुझे तुम्हे चोदने से कोई नहीं रोकेगा.”

वो मुझे खिसकाता हुआ पलंग के कोने तक ले आया और मेरा सर पलंग के साइड से लटक सा गया. अब उसने मुझे चार-चार सेकंड के अंतराल से एक एक बहुत गहरा झटका चूत के अंदर मारना शुरू किया.

थोड़ा पानी तो उसका बनने ही लगा था और थपाक की एक जोर की आवाज के साथ वो झटके मार रहा था.

उसके जोर के गहरे झटके के आगे मैं कराहने के अलावा कुछ ना कर सकी. हर चार सेकंड में एक झटका और उसके बाद मेरी एक आहह्ह्ह..

बाथरूम से फ्लश की आवाज आयी और मैं घबरा गयी कि अशोक आने वाला हैं, पर रंजन ने मुझे बिस्तर से लटका के रखा था और मैं उसके झटके के अलावा हिल भी नहीं पा रही थी.

इन्ही रुक रुक कर पड़ते झटको के बीच अशोक बैडरूम में आया और मुझे चुदता देख रंजन को रोकने लगा.

अशोक: “सुहागरात हो गयी, छोड़ दे अब तो.”

रंजन झटके मारते मारते ही बोला “अभी चौबीस घंटे कहा हुए. थ्प्पप्प्प [झटका] आह्हह्ह्ह.. अभी तो ये मेरी बीवी हैं, थ्प्प्पप्प्प [झटका] आह्हह्ह्ह.. बीवी को चोदने में क्या बुराई हैं.”

मैं अपने आप को अशोक की नजर में खुद को एक शिकार दिखाते हुए उससे बचाने की गुहार करने लगी.

मैं: “अशोक थ्प्प्पप्प्प [झटका] आह्हह्ह्ह्ह.. छुड़ाओ ना मुझे थ्प्पप्प्प [झटका] आह्हह्ह्ह..”

अशोक ने आगे बढ़कर रंजन को रोका और मैं उसके चंगुल से छूट कर उठ खड़ी हुई. मेरा दुल्हन का वेश वहा बिखरा पड़ा था. मैंने अपना शर्ट पाजामा निकाला और बिना पहने ही उसे लेकर बाथरूम में भाग गयी.

थोड़ी देर बाद मैं बाथरूम से निकली. अशोक सोच रहा था कि वो काम पर जाए ना जाये. एक छुट्टी वो पहले ही ले चूका था, तो आज रुकने का मुश्किल था और उसे मुझे ना चाहते हुए भी अपने टेम्पररी पति के भरोसे छोड़ कर जाना था.

अशोक ने मुझसे कल रात के व्यवहार के लिए माफ़ी मांगी. मैंने अशोक के लिए लंच पैक कर के दिया, मैंने अशोक को विदा किया ये जानते हुए कि रंजन मेरा पुरे दिन क्या हाल करने वाला था.

मैं कपड़े लेने बेडरूम में गयी तब तक रंजन अंदर बेडरूम में ऐसे ही नंगा पड़ा था. रंजन ने मुझे फिर पकड़ लिया.

मैं: “छोडो मुझे.”

रंजन: “मेरी बीवी हो, ऐसे कैसे छोड़ दूँ.”

मैं: “अपनी बीवी को नहाने भी नहीं दोगे क्या?”

रंजन: “चलो मैं भी आता हूँ, पति पत्नी आज साथ में नहाएंगे.”

मैं अपने असली पति के साथ भी आज तक बाथरूम में साथ नहीं नहाई फिर ये तो एक दिन का पति था.

रंजन मुझे ले कर बाथरूम में आ गया साथ में नहाने को. मुझे सीधा ले जाकर शॉवर के नीचे खडी कर दिया और शॉवर चालू कर दिया. मैंने शर्ट और पाजामा पहन रखा था जो थोड़ी ही देर में पूरा गीला हो गया. उसने मुझे पीछे से झकड़ कर रखा था.

उसने तो वैसे भी कपड़े नहीं पहन रखे थे, पर कपड़ो के गीले होने से मैं असहज होने लगी. उसने अब आगे से मेरे गीले शर्ट के बटन खोलना शुरू कर दिया.

एक एक बटन खुलने के साथ ही मेरा ब्रा दिखने लगा. सारे बटन खोल उसने शर्ट को मेरे कंधो और हाथों से निकाल नीचे फेंक दिया.

उसके बाद उसने मेरे ब्रा सहित मेरे बड़े मम्मो को मसलना शुरू कर दिया. मेरे मम्मे दबने से ब्रा के ऊपर से फूल फूलकर कर बाहर आ रहे थे. उसने अपने होंठ मेरे कंधो पर रख चूमना शुरू किया और मैं सिसकिया भरने लगी.

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अगली बारी मेरे पाजामे की थी. उसने नीचे बैठते हुए मेरा पाजाम नीचे से पूरा निकाल दिया. वो तो मेरी पैंटी भी निकालने वाला था, पर मैंने उसको पकड़े रख कर नहीं निकालने दिया. वह अब फिर खड़ा हो गया और मेरे कंधे और गर्दन को चूमने लगा.

मेरी पीठ पर हाथ फेरते फेरते उसने मेरी ब्रा का हुक भी खोल दिया और नंगी पीठ पर चूमने लगा. मैं सिसकिया भरते हुए आँखें बंद रख मजे लेने लगी. उसने मेरी ब्रा के दोनों स्ट्रैप को कंधे से नीचे लुढ़का दिया, मेरी मुड़ी हुई कोहनियो पर ब्रा अटक गया.

मैंने अपने हाथ सीधे किये और ब्रा को नीचे गिरने दिया. ब्रा के नीचे गिरते ही उसने अपने दोनों हाथ आगे लाते हुए मेरे दोनों फूल कर तन चुके मम्मो को दबोच लिया.

अगले कुछ मिनट वो मेरी चूंचियो को ऐसे ही मसलता रहा.

उसने मुझे पीछे से झकड़ कर रखा था और अब तक उसका लंड कड़क हो चूका था और मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरे नितम्बो को छू रहा था.

अब उसने अपना एक हाथ मेरे मम्मो से हटाया और मेरे कमर और पेट पर फेराने लगा, जब कि दूसरा अभी भी मेरे मम्मो को मसल रहा था.

पेट पर हाथ फेरते फेरते मेरी पैंटी में आगे से हाथ घुसा दिया और मेरी चूत पर रगड़ने लगा. उसका एक हाथ मम्मो पर, दुसरा मेरी चूत पर तो उसका लंड मेरी गांड पर मल रहा था.

उसने मेरी गरदन के पीछे अपने होंठ रख कर मुझे चूमा और अपने होंठ चूमते चूमते रगड़ते हुए रीढ़ की हड्डी के सहारे पीठ पर फिराते हुए नीचे आता गया और साथ ही मम्मो पर रखा हाथ भी नीचे कमर पर आ गया और पैंटी में घुसाया हाथ भी निकाल कमर के दूसरी तरफ रख दिया.

अब वो चूमते चूमते अपने होंठ कमर के नीचे जहा पैंटी बंधी थी वहा तक ले आया. एक दो पल वो वही चूमता हुआ रुका. अब उसने अपने दोनों हाथ जो कमर पर रखे थे उनसे मेरी पैंटी नीचे खिसकाते हुए अपना चूमना जारी रखते हुए पैंटी के साथ ही साथ नीचे उतरता रहा.

मेरी पैंटी अब मेरी गांड को उघाड़ते हुए नीचे आ गयी और उसका चूमना मेरी गांड की दरारों पर आकर रुक गया. उसने मेरी पैंटी पूरी पाँव से निकाल दी और मेरी चूत से निकला मेरा चिकना पानी शॉवर के पानी से मिल कर धुल गया.

मैं अब बुरी तरह से थरथराते हुए तड़प रही थी. उसकी जादुई छुअन ने मुझको पूरा झकझोर दिया था. वो एक बार फिर उठ कर मेरे पीछे से चिपक कर खड़ा हो गया.

उसने शावर बंद किया. उसने साबुन उठाया और मेरे मम्मो पर प्यार से रगड़ कर झाग बना के अपने हाथ से मलने लगा. उसके हाथ मेरे मम्मो पर फिसलते हुए मालिश कर रहे थे. उसने फिर साबुन मेरे पेट और कमर और पीठ पर भी लगा कर आगे पीछे सब तरफ बारी बारी से मलने लगा. खास तौर से वो मेरे मम्मो को सहला रहा था.

अब उसने मेरी गांड जांघो और फिर मेरी चूत पर साबुन लगा दिया और रगड़ने लगा. मैं मदहोश हो कर सिसकियाँ मार रही थी.

फिर मेरी बारी आयी साबुन लगाने की. मैंने भी उसके सीने पेट और पीठ पर साबुन लगाया. उसके गांड पर साबुन लगाते वक्त मुझे बड़ी शर्म आयी. लगते लगाते ही वो घूम गया और अपना लंड आगे कर दिया. वो तो पहले से ही कड़क था तो मैंने थोड़ा साबुन अपने हाथों पर लगा कर उसका लंड अपने हाथों में लिया और प्यार से रगड़ने लगी. वो मजे के मारे अब सिसकियाँ लेने लगा.

मैंने थोड़ा साबुन उसके लंड के नीचे लटकी थैलियों पर भी मला. सारा साबुन लगा कर मै अब खड़ी हो गयी. उसने मुझे गले लगा लिया और मेरा बदन आगे से उसके बदन से चिपक कर थोड़ा फिसलने लगा. उसने अपने होंठो में मेरे गीले होंठ एक पल के लिए भरे और छोड़ दिए.

दो पलो के बाद उसने फिर मेरे होंठ अपने होंठ से पकड़ छोड़ दिए. सात आठ बार उसने ऐसे ही मेरे होंठ पकड़ कर छोड़े और मैं उसके होंठो को पकड़ने के लिए तड़पती रही. वो मुझे तरसा रहा था.

अगली बार जैसे ही वो अपने होंठ मेरे होंठो पर लाया, मैंने उसके होंठो अपने होंठो से पकड़ ही लिया और छोड़ने नहीं दिया. हम दोनों एक लम्बी चुम्बन में खो गए और एक दूसरे की जबान को मुँह में रगड़ते चुम्बन का आनंद लेने लगे.

उसका लंड धड़कता हुए आगे से मेरी चूत के ऊपर हलके धक्के मार रहा था. जब मैंने उसको चूमना छोड़ा तो उसने मुझे दीवार के सहारे पीठ कर खड़ा कर दिया और एक फ़ीट दूर खड़ा हो गया. मैंने हसंते हुए उसका लंड अपने हाथ में पकड़ा और अपनी तरफ खिंचा. वो मेरे करीब आ गया और मेरी एक टांग घुटनो के नीचे हाथ डाल ऊपर कर दी.

मैं उसका लंड अभी भी पकड़े थी, तो अपनी चूत के छेद के पास ले आयी और अंदर डालने लगी. उसने भी हल्का सा जोर लगाया और साबुन लगा लंड फिसलता हुआ मेरी चूत में उतर गया. एक बार अंदर जाने के बाद जैसे हम दोनों को करार आया.

रंजन अब ऊपर नीचे होते हुए खड़े खड़े ही मेरी चूत चोदने लगा. इतनी देर की कामुक मसाज से वैसे ही हमारा पानी निकलना शुरू हो गया था, तो उसके लंड के अंदर घुसते ही हमारा काम शुरू हो गया था और दोनों का पानी मेरी चूत के अंदर संगम करने लगा.

हम दोनों जोर जोर की आहें भरते हुए थोड़ी थोड़ी देर से अपना बून्द बून्द पानी छोड़ते हुए मजे ले रहे थे. मैंने एक हाथ से शॉवर फिर शुरू कर दिया और हम दोनों भीगते हुए चुदाई का मजा लेने लगे. इतना पानी हो गया था कि समझ ही नहीं आया कौन सा पानी शॉवर का था और कौनसा मेरी चूत से निकला हुआ था.

उसने अब अपना लंड मेरी चूत से निकाला और मुझे दीवार की तरफ मुँह कर खडी कर दिया. मैं आगे सर झुका कर दोनों हाथ दीवार पर टिकाये खड़ी हो गयी और उसने मेरी गांड के दोनों हिस्सों को चौड़ा करते हुए अपने लंड के लिए जगह ढुंडी और अपना लंड एक बार फिर मेरी चूत में घुसा कर चोदने लगा.

इस स्तिथि में वो अब और भी जोर से झटके मार पा रहा था और गिरते पानी और चूत के अंदर छूटे पानी की वजह से अंदर बाहर दोनों तरफ शरीर टकराने से जोर जोर थप्प्प्पप थप्प्पप्प्प थप्प्पप्प्प की आवाजे होने लगी. बाहर से थपाक आवाज और उसके बाद अंदर से फच्चाक की आवाज एक के बाद एक आ रही थी.

थोड़ी देर इसी तरह जोर जोर से चोदते हुए उसने अपना सारा पानी मेरी चूत में खाली करते हुए झड़ गया और मैं भी इस बीच आहें भरते और अंत में झड़ते हुए चीखने लगी. झड़ने के बाद हमने शॉवर में नहा कर अपने शरीर को साफ़ किया.

नहाने के बाद उसने मुझे कपड़े भी नहीं पहनने दिए. हम दोनों नंगे ही बाहर आये और इसी हालत में हमने नाश्ता किया. उसने मुझे सिर्फ बाल बनाने दिए और मेकअप करने दिया.

हम दोनों की शादी ख़त्म होने में कुछ घंटे ही बचे थे. हनीमून पर तो जा नहीं सकते वो मुझे मूवी दिखाने ले जाना चाहता था. घर पर रहकर उसके हाथों चुदती इससे अच्छा था कि बाहर मूवी ही देख ली जाये.

उसकी फरमाइश पर एक नई नवेली दुल्हन की तरह मुझे साड़ी पहननी पड़ी. वो मुझे एक मल्टीप्लेक्स में ले जाने की बजाय एक सिंगल स्क्रीन थिएटर में ले गया वो भी एक फ्लॉप मूवी दिखाने के लिए. वो मुझे सबसे पीछे वाली कतार में कोने वाली सीट पर ले गया.

मंगलवार की सुबह थी तो पूरा हॉल लगभग खाली था. हमारी तरह कुछ प्रेमी जोड़े जरूर थे जो एक एक कोना पकड़ कर बैठे थे. वो भी एकांत की जगह की तलाश में आये थे, ताकि अपने साथी को चुम सके और यहाँ वहा हाथ लगा कर छू सके.

शायद रंजन का भी यही प्लान था, पर वो ये काम घर पर भी कर सकता था. शायद ज्यादा रोमांच के लिए वो पब्लिक में लाकर ये सब करना चाहता था.

उसने मेरी पीठ पर हाथ ले जाकर मेरा ब्लाउज पीछे से खोल दिया और फिर आगे से ब्लाउज के नीचे हाथ घुसा कर मेरे मम्मे दबाने लगा. मैं बस हल्का सा विरोध ही कर पा रही थी. मैं थिएटर में अकेली लड़की नहीं थी, वहा बाकी लड़कियों का भी यही हाल था.

रंजन ने मुझे उसकी गोद में बैठने को कहा, मैंने मना कर दिया पर उसने जबरदस्ती मुझे खिंच कर अपनी गोद में बैठा ही दिया. एक बार बैठने के बाद तो उसने अपने दोनों हाथ आगे लाकर मेरे ब्लाउज में घुसा दिए और आराम से दबाने के मजे लेने लगा.

फिर उसने मेरी ब्रा का हुक खोल कर मेरे कंधे से स्ट्रेप निकाल दिए. फिर ब्लाउज के अंदर हाथ डाल कर ब्रा पूरा निकाल दिया और मेरी खाली सीट पर रख दिया.

मैं अपनी साड़ी से अपना सीना ढकने का प्रयास करती रही. थोड़ी देर बाद उसने मुझे अपनी गोदी से उठा कर आगे की खाली सीट के हेड रेस्ट पर झुका दिया. उसने मौका देख मेरे विरोध के बावजूद मेरी साड़ी को पेटीकोट सहित नीचे से ऊपर उठा दिया और मेरी पैंटी पकड़ कर नीचे खींच उसे भी मेरे सैंडल से होते बाहर निकाल कर पास वाली सीट पर ब्रा के पास रख दिया.

मैं घबरा कर एक बार फिर उसकी गोद में बैठ गयी. पास वाली सीट पर मेरे अंदर के कपडे पड़े हुए थे और मुझे डर लगने लगा कि ये अब क्या पूरा नंगा करेगा.

हालांकि हॉल में अँधेरा था पर स्क्रीन पर चलती मूवी से रह रह कर थोड़ा उजाला हो रहा था, आगे की कुछ सीटों पर बैठे कपल्स को आपस में चूमते हुए की झलक दिख रही थी.

रंजन ने फरमाइश रखी कि वो मुझे अभी इसी वक़्त चोदना चाहता हैं. मैंने उसको कहा कि यहाँ बहुत खतरा हैं, उसे जो भी करना हैं घर जाकर करे मैं उसको मना नहीं करुँगी. पर वो अपनी जिद पर अड़ गया.

कौनसा पति अपनी पत्नी को खुले में चोदना चाहेगा, पर वो कौनसा मेरा परमानेंट पति था जो इतना सोचता.

आगे क्या होगा ये तो आपको इस चुदाई स्टोरी के अगले एपिसोड में पता चलेगा!

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