Badi Mushkil Se Biwi Ko Teyar Kiya – Part 13

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Desi Sex Story

मैंने अपने होंठ नीना के होंठ से मिलाये और मैं अपनी पत्नी के होठों को चूमने लगा। तब मेरी बीबी ने मुझे मेरे कान में धीरेसे कहा , “जानूँ, मैं अब भी बहुत चुदाई करवाना चाहती हूँ। मुझे चोदो।“

जब नीना ने देखा की मैं थोड़ा थका हुआ था और मेरे लण्ड को खड़ा होने में समय लगेगा, तब नीना ने अनिल को अपनी और खींचा। जब अनिल ने नीना के स्तनों से अपना मुंह हटाया तब मैंने देखा की मेरी बीबी के गोरे गोरे मम्मे लाल हो चुके थे। अनिल के दाँतों के निशान भी कहीं कहीं दिखते थे। नीना की निप्पालें कड़क तनी हुयी थी। जैसे ही मैंने नीना के इर्दगिर्द से मेरी टाँगें हटायीं और उसके दोनों पॉंव मेरे कंधे से उतारे, तो मेरी बीबी ने मेरे मित्र को अपने ऊपर चढ़ने का आह्वान दिया। अनिल का लण्ड तो जैसे इस का बेसब्री से इन्तेजार कर रहा था की कब मैं उतरूँ और कब वह अपनी पोजीशन दोबारा सम्हाले।

अनिल का घोडे के लण्ड के सामान लंबा और मोटा लण्ड तब मेरी बीबी की चूत पर रगड़ने लगा। तब भी वह अपने पूर्व रस झरने से गिला और स्निग्ध था। मेरी पत्नी की चूत भी मेरी मलाई से भरी हुई थी। शायद अनिल के मनमें यह बात आयी होगी की उसे अब वह आनंद नहीं मिलेगा जो पहली बार नीना को चोदने में मिला था, क्योंकि नीना की चूत मेरी मलाई से भरी हुयी थी।

पर उसकी यह शंका उसके नीना की चूत में अपने लण्ड का एक धक्का देने से ही दूर हो गयी होगी, क्योंकि जैसे ही अनिल ने अपना लण्ड मेरी बीबी की चूत में धकेला की मेरा सारा वीर्य नीना की चूत से उफान मरता हुआ बाहर निकल पड़ा। नीना के मुंह से तब एक हलकी सी सिसकारी निकल पड़ी। वह आनंद की सिसकारी थी या दर्द की यह कहना मुश्किल था।

धीरे धीरे अनिल ने मेरी पत्नी को बड़े प्यार से दोबारा चोदना शुरू किया। नीना को तो जैसे कोई चैन ही नहीं था। अनिल के शुरू होते ही नीना ने अपने चूतड़ों को उछालना शुरू किया। वह अनिल की चुदाई का पूरा आनंद लेना चाहती थी। अनिल की चोदने रफ़्तार जैसे बढती गयी वैसे ही नीना की अपने कूल्हों को उछाल ने की रफ़्तार भी बढ़ गयी।

अनिल के हाथ तब भी मेरी बीबी के मम्मों को छोड़ने का नाम नहीं ले रहे थे। नीना ने अनिल का सर अपने हाथों में लिया और चुदाई करवाते हुए नीना ने अनिल को अपने स्तनों को चूसने को इशारा किया। मुझे ऐसा लगा की अनिल के नीना के मम्मों को चूसना नीना को ज्यादा ही उत्तेजित कर रहा था।

उनकी चुदाई देख कर मुझे बड़ा आश्चर्य हो रहा था। मैं तब समझा की अनिल और नीना कई हफ़्तों या महीनों से एकदुसरेको चोदने और चुदवाने के सपने देख रहे होंगे। यह कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे हैं।

ऐसा लग रहा था की दोनों में से कोई भी दूसरे को छोड़ने को राजी नहीं था। मुझे इन दोनों की चुदाई से इतनी उत्तेजना हो रही थी की मुझसे रहा नहीं गया और मैंने नीना की चूत पर हाथ रखा और मेरे अंगूठे और तर्जनी (अंगूठे के पास वाली उंगली) से अनिल के पिस्टन जैसे लण्ड को दबाया।

अनिल अपने लण्ड को नीना की चूत के अंदर घुसेड़ रहा था और निकाल रहा था। उसकी फुर्ती काफी तेज थी। जब मैंने अंगूठे और तर्जनी से उसके लण्ड को मुठ में दबाने की कोशिश की तो शायद अनिल को दो दो चूतो को चोदने जैसा अनुभव हुआ होगा। नीना ने भी मेरा हाथ पकड़ा और वह मेरी इस चेष्टा से वह बड़ी खुश नजर आ रही थी।

तब अचानक अनिल थम गया। नीना अनिल को देखने लगी की क्या बात है। अनिल ने नीना की चूत में से अपना लण्ड निकाल दिया और मेरी बीबी की कमर को पकड़ कर उसे पलंग से नीचे उतरने का इशारा किया।

नीना पहले तो समझ न पायी की क्या बात है। पर जब अनिल ने उसे पलंग से सहारा लेकर झुक कर खड़ा होने को कहा वह समझ गयी की अनिल उसे डोगी स्टाइल में (जैसे कुत्ता कुतीया को चोदता है) उसे चोदना चाहता है।

नीना उस ख़याल से थोड़ा डर गयी होगी की कहीं अनिल उसकी गांड में अपना लण्ड घुसेड़ न दे, क्योंकि उसने मेरी और भयभरी आँखों से देखा। उसके डर का कारण मैं समझ गया था। मैंने उसे शांत रहने को और धीरज रखने का इशारा किया।

शायद मेरा इशारा समझ कर वह चुपचाप पलंग पर अपने हाथ टीका कर आगे की और झुक कर फर्श पर खड़ी हो गयी। अनिल मेरी बीबी की खूबसूरत गांड को अपने हाथों में मसलने लगा। आगे की और झुकी हुई और अपनी गांड और चूत अनिल को समर्पण करती हुई मेरी पत्नी कमाल लग रही थी।

ऐसे लग रहा था की कोई कुतिया अपने प्यारे कुत्तेसे चुदवाने के लिए उतावली हो रही थी। नीना पूरी गर्मी में थी। उस पर अनिल से चुदवाने का जनून सवार था। उस समय यदि अनिल मेरी बीबी की गांड में अपना लण्ड पेल भी देता तो वह दर्द से कराहती और शोर भी जरूर मचाती पर शायद अनिल को छोड़ती नहीं और उस से अपनी गांड भी मरवा लेती।

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